Thursday, May 12, 2011

अजीब कशमकश में हूं


रेत का समंदर था
नाव चलाने की कोशिश की
बिना बाज़ुओं की दीवार थी
लिपट जाने की कोशिश की

साँसों में रेत भर गयी
माथे पे चोट है
अब मुझे भी ये लगाने लगा है
मेरी किस्मत में खोट है

प्यार तो मेरा था
तू किस लिए निभाती
प्यास भी मेरी अपनी
बाहों में कैसे आती

अपनी शिकस्त का अब
इल्म हो रहा है
छिप छिप के कही मुझ से
मेरा मन रो रहा है

तेरे शहर में रह के
मन को कहाँ मनाऊँ
खुद से पूछता हूं
दुनिया से क्यों ना जाऊं

कभी नही रहूं तो
मुझ को ना तू भुलाना
चाहता था तुझ को
पागल सा इक दीवाना

अधूरी सी आज मुझ में
मरने की आरज़ू है
मर के तुझे है खोना
और ज़िंदगी में तू है

रेत के समंदर से
गुज़र भी नही सकता
रेत की लहरों में
ठहर भी नही सकता
अजीब कशमकश में हूं
जी भी नही सकता
मर भी नही सकता

17 comments:

हरकीरत ' हीर' said...

बहुत खूब .....

ये कशमकश बनी रहे .....

आपकी तस्वीर देख याद आ गया .....

masoomshayer said...

shukriyaa heer

Mehek said...

Hmmmm zindagi ki vashtaviktaye darshaati hai.. dard jo lafzo se chhalak raha hai.

anju choudhary..(anu) said...

waha bahut khub..............har bar ki tarhe...kamal likha aapne anil ji

kamal ...kamal sach mei

masoomshayer said...

mehek bahut bahut shukriya

masoomshayer said...

anju bahut bahut dhanyavad belog par dobara se aane kee himmat dee mujhe

mohita said...

kya baat he ik aag ka dariya hai doob k jana hai

masoomshayer said...

shukriyaa mohita

rewa said...

vaise kuch bolne ki jaroorat hai kya......as rachna khud hi bol rahi hai......bahut bahut acchi lines hain

Neeraj said...

Achha hai Anil ji

अर्चना गंगवार said...

रेत के समंदर से
गुज़र भी नही सकता
रेत की लहरों में
ठहर भी नही सकता

bahuuuuuut khoob ,maza aaa gaya perker....

masoomshayer said...

rewa shukriyaa

masoomshayer said...

neeraj dhanyavad

masoomshayer said...

archna ajee abhaar aap kaa

leena malhotra said...

bahut khoob

masoomshayer said...

shukriya leena

Anonymous said...

Anil ji namaste
Barso dhoonda aapko
Iss Jaal ke samandar me
Aaj jaakar aapka pata Milaa
Aur kuchh yun mila ke
Parh kar Maja aagaya